पूरे अधिकार की अधूरी जानकारी ठीक नहीं

शिमला। राजधानी के राजकीय कन्या महाविद्यालय में शनिवार को विश्व मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य में मानवाधिकार जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कॉलेज प्राचार्य प्रो. मीरा वालिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हर मानव को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। अधिकारों की अधूरी जानकारी की वजह से लोग अपने हकों से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में हर व्यक्ति को बराबरी, आजादी, अपने तरीके से जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित बनाने के लिए 28 सितंबर 1993 में मानवाधिकार कानून लागू किया गया। 12 अक्तूबर 1993 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया। भारतीय संविधान इसकी अनिवार्यता निर्धारित करता है। वहीं कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए दंड का प्रावधान भी रखा गया है। उन्होंने कहा कि दुराचारी, आतंकवादी का कोई मानवाधिकार नहीं होना चाहिए। मगर ऐसे मामलों में पकड़े गए निर्दोष व्यक्ति के साथ जांच पड़ताल के दौरान अन्याय न हो इसलिए उन्हें भी मानवाधिकार के तहत अपने अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की जाती है। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शरीक हुए वैश्विक मानवाधिकार परिषद के अध्यक्ष अरविंद ठाकुर ने कहा कि पूरी दुनिया मानवता के खिलाफ हो रहे जुल्मों को रोकने के लिए वैश्विक मानवाधिकार परिषद अहम रोल अदा कर रही है।
कार्यक्रम में छात्रा विनम्रता, ओशीन, तन्वी, पूजा, आंचल, प्रीतिका जमवाल, नेहा चौहान ने अपने विचार रखे। इन छात्राओं ने बताया कि मानवाधिकार विषय विश्व भर के लिए सबसे गंभीर विषय है। उन्होेंने इस दौरान मानवाधिकारों का दुरुपयोग कर अपने हितों को साधने के कई प्रमाण भी सभागार में मौजूद छात्राओं के समक्ष रखे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी अजय वशिष्ठ ने भी अपने विचार रखकर छात्राओं को जागरूक किया।

Related posts